रेलवे ने यात्रियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए ट्रेनों काे तो बंद कर दिया, लेकिन बरसों तक रेलवे में नौकरी कर चुके वरिष्ठ नागरिकों को कोरोना का खतरा लेकर घर से निकलने को मजबूर कर रहा है। ये लोग रेलवे अस्पताल पहुंच रहे हैं तो दवाएं भी पूरी नहीं मिल रहीं।
स्थानीय स्तर पर खरीदी (लोकल पर्चेज) का सिस्टम भी बंद हो गया है। ऐसे में कुछ दवाएं तो इन लोगों को बाजार से खरीदनी ही पड़ेंगी। रेलवे बोर्ड ने करीब दस दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मरीज के बाजार से दवा खरीद बिल देने का आदेश दिया था, इसे भी रेलवे लागू नहीं कर पाया है। यह स्थिति तब है जब के.के. कॉलोनी में कोरोना की पॉजिटिव महिला यहां जाकर आ चुकी है और रेलवे अस्पताल के दो डॉक्टर इन दिनों होम आइसोलेशन में हैं। हालांकि टेस्ट नेगेटिव आए हैं।
दरअसल, रेलवे के जोधपुर मंडल में करीब 16 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं तो करीब 10 हजार कार्यरत कर्मचारी। इनमें से अधिकांश जोधपुर शहर में हैं। खासकर, सेवानिवृत्त कर्मचारी शुगर, ब्लडप्रेशर, हार्ट जैसी बीमारी से ग्रसित हैं। इन्हें नियमित रूप से दवा लेनी होती है, जो अमूमन एक माह के लिए साथ दी जाती है। प्रत्येक माह की शुरुआत में इन लोगों की रेलवे अस्पताल में कतार लगने लगती हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में भी इन्हें दवा के लिए घर से निकलना पड़ रहा है। वह भी तब, जब रेलवे खुद अपने अस्पताल में 60 बेड तैयार कर कोरोना संदिग्ध को यहां रखने के लिए सौंपने जा रहा है। कोरोना संक्रमण का खतरा उठा ये मरीज जब अस्पताल पहुंच रहे हैं तो वहां जाने पर यह कह दिया जाता है कि कुछ दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, बाजार से खरीद लो। ऐसे में शहर के दूर इलाकों से आने वाले लोगों को बेवजह तकलीफ भी उठानी पड़ रही है।
व्यवस्था कैसे बनाएं, इस पर चल रहा मंथन
उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन के मुख्य प्रवक्ता अभय शर्मा के मुताबिक वरिष्ठ रेलवे कर्मचारियों को उनके घर पर ही दवा पहुंचाने या किसी अन्य तरीके से उन तक दवाओं की पहुंच सुगम बनाने को लेकर उच्च स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है।
नौ दिन पहले रेलवे बोर्ड ने आदेश दिया, अभी तक लागू नहीं
दरअसल, केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 27 मार्च को आदेश जारी कर कहा कि लोगों के बीच दूरी बनाए रखने और लॉकडाउन की पालना के मद्देनजर सीजीएचएस स्कीम के तहत ओपीडी मरीज के दवाओं के बाजार से खरीदने के बाद बिल पेश करने पर उनका भुगतान किया जाए। रेलवे में दो तरह के मेडिकल बेनीफिट वाले कर्मचारी होते हैं। एक सीजीएचएस लेते हैं तो दूसरे रेलवे अस्पताल से अपना इलाज करा वहीं से दवा लेते हैं। ऐसे में रेलवे बोर्ड ने भी 28 मार्च को केंद्र के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के पत्र को रेलवे में लागू करने का आदेश तो जारी कर दिया, लेकिन व्यवस्था नहीं बनाई। साथ ही, जो इस स्कीम में नहीं है, वे भी इस स्कीम के तहत बाजार से दवा खरीद सकते हैं या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं किया।